प्रदेश निजी विवि के कोर्स पर संकट अब चलाना होगा दो वर्षीय कोर्स
भोपाल
बार काउंसिल आॅफ इंडिया (बीसीआई) ने देशभर में चल रहे एक वर्षीय एलएलएम कोर्स पर रोक लगा दी है। प्रदेश के साथ देशभर के कॉलेज और विवि दो वर्षीय एलएलएम संचालित कर पाएंगे। अभी तक एनएलआईयू के अलावा निजी विवि में एक वर्षीय एलएलएम संचालित हो रहा था। यहां तक बीयू भी आगले सत्र में एक वर्षीय एलएलएम शुरू करने जा रहा था, जिससे उसकी तैयारी फीकी हो गई है। अब विवि और कॉलेज को एलएलएम चलाने के लिए बीसीआई की मंजूरी लेना होगी।
बीसीआई ने देशभर में चल रहे एलएलएम को अपने अंडर में ले लिया है। यहां तक एक वर्षीय एलएलएम पर रोक लगा दी है। अब विवि और कालेज दो वर्षीय एलएलएम चला पाएंगे। एलएलएम की पढ़ाई कराने के लिए उन्हें बीसीआई की मंजूरी लेना होगी, उन्हें पांच साल की मान्यता दी जाएगी। जानकारी के मुताबिक एक वर्षीय एलएलएम का विद्यार्थियों की पढ़ाई में काफी कठिनाई आ रही थी, जिसकी शिकायतें बीसीआई में दर्ज की गई थीं। यहां तक विधि कोर्स को 2020 की पालिसी से दूर रखा गया था। इसलिए विधि कोर्स को बीसीआई ने अपने अंडर में लिया है। एक वर्षीय एलएलएम राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय (एनएलआईयू) के अलावा निजी विवि में चल रहा था। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के विधि विभाग में एक वर्षीय एलएलएम चलाने के लिए कार्यपरिषद में मंजूरी मिल चुकी थी। बीसीआई द्वारा जारी किए गए गजट में एक वर्षीय एलएलएम की रोक के बाद अब उन्हें दो वर्षीय एलएमएल को जारी रखना होगा।
कोई विद्यार्थी विदेशी विवि से एक वर्षीय एलएलएम करके भारत आता है। उनका तीन या पांच वर्षीय यूजी कोर्स भारत के यूजी के समकक्ष नहीं होते हैं, तो उसे एक साल तक अध्यापक सहायक के तौर पर अपनी सेवाएं देना होगी। इसका सर्टिफिकेट बीसीआई जारी करेगा। इसके बाद एलएलएम मान्य होगा।
पीएचडी करने वाले रिसर्च स्कॉलर कोर्सवर्क में एक सेमेस्टर विद्यार्थियों को अध्ययन कराना अनिवार्य होगा। दो वर्षीय एलएलएम में विधि एवं सामाजिक परिवर्तन, विधि एवं न्याय के सिद्धांत, अनुसंधान पद्धति और पाठ्यक्रम के खाका का डिजाइन और मात्रात्मक विश्लेषण विषय को करना अनिवार्य होगा।
विधि प्रोफेसरों के लिए बीसीआई रिफ्रेशर कोर्स चलाएगा। इसके लिए राष्टÑीय स्तर के संस्थानों को केंद्र बनाया जाएगा। एमएमएल कोर्स की मान्यता देने के लिए गठित कमेटी में राष्टÑीय विवि संस्थान के वर्तमान या पूर्व कुलपति को रखा जाएगा। वह निरीक्षण करेंगे, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर एलएलएम की स्वीकृति दी जाएगी।

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